वक्फ बोर्ड के आदेश पर राजस्व रिकॉर्ड बदलने को बाध्य नहीं हैं डीएम: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अपनी सामान्य शक्तियों का इस्तेमाल करके जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को वक्फ संपत्तियों से जुड़े सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में किसी का नाम दर्ज करने, हटाने या बदलने का निर्देश नहीं दे सकता। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय ने शम्स तबरेज की याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।

पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि राजस्व अभिलेखों में नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के तय कानूनी प्रावधानों के तहत ही पूरी होनी चाहिए। अदालत ने रेखांकित किया कि जब किसी विशिष्ट कानून में किसी कार्य की निश्चित प्रक्रिया निर्धारित हो, तो सामान्य शक्तियों का हवाला देकर उस वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

प्रतापगढ़ वक्फ संपत्ति से जुड़ा है मामला

यह विवाद प्रतापगढ़ स्थित वक्फ संख्या 1339 के प्रबंधन से संबंधित है। याचिकाकर्ता शम्स तबरेज का कहना था कि लखनऊ स्थित सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने 13 जनवरी 2025 को एक आदेश जारी कर कासिम नदीम का नाम हटा दिया था और तबरेज को प्रबंध समिति का सचिव नियुक्त किया था।

इसके बाद तबरेज ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि प्रतापगढ़ के डीएम को वक्फ बोर्ड के फैसले के अनुसार राजस्व अभिलेखों में आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वक्फ अधिनियम की धारा 28 बोर्ड को जिला मजिस्ट्रेट को ऐसे प्रशासनिक निर्देश देने का अधिकार देती है।

वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने इस मांग का कड़ा विरोध किया। सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि राजस्व रिकॉर्ड में किसी भी प्रकार का संशोधन या नामांतरण केवल उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 में दी गई तय प्रक्रिया के अनुसार ही संभव है।

तहसीलदार के अधिकार क्षेत्र में है नामांतरण

हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के आंतरिक अभिलेखों और सरकारी राजस्व रजिस्टरों के बीच के कानूनी अंतर को स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि वक्फ अधिनियम की धारा 41 बोर्ड को अपने वक्फ रजिस्टर में संशोधन का अधिकार तो देती है, लेकिन सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में फेरबदल का अधिकार जिला मजिस्ट्रेट के पास नहीं, बल्कि संबंधित तहसीलदार के पास है।

पीठ ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 के तहत तहसीलदार के लिए यह कानूनी बाध्यता है कि वह नामांतरण आदेश जारी करने से पहले सभी संबंधित पक्षों के दावों और आपत्तियों की विधिवत सुनवाई करे। चूंकि कानून में यह अधिकार डीएम को नहीं दिया गया है, इसलिए केवल वक्फ बोर्ड के निर्देश के आधार पर डीएम राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं।

सक्षम राजस्व अदालत जाने की छूट

हाईकोर्ट ने डीएम को आदेश जारी करने की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास कानूनी विकल्प खुले हैं। अदालत ने तबरेज को छूट दी कि वह उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 34 के तहत सक्षम राजस्व प्राधिकारी (तहसीलदार) के समक्ष नियमानुसार नामांतरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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