गाजियाबाद पुलिस की छापेमारी का मामला: पूर्व मेयर फरहाद सूरी की याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, स्थानीय पुलिस से संपर्क करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पूर्व मेयर फरहाद सूरी के आवास पर कथित तौर पर अवैध छापेमारी करने वाले गाजियाबाद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को सीधे संविधान के अनुच्छेद 32 का सहारा लेने के बजाय कानूनी प्रक्रिया के तहत स्थानीय पुलिस के पास जाना चाहिए।

बीएनएसएस के तहत कानूनी रास्ता अपनाने का निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की शिकायत को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175 के तहत संबंधित थाने में उठाया जा सकता है। पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि यह संदेह करने का कोई आधार नहीं है कि सक्षम पुलिस बल कानून के प्रावधानों के अनुरूप काम नहीं करेगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अंतर-राज्यीय पुलिस छापों को विनियमित करने के लिए व्यापक दिशानिर्देश तय करने की फरहाद सूरी की वैकल्पिक अर्जी को भी खारिज कर दिया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने किया याचिका का विरोध

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने याचिका की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए इसका कड़ा विरोध किया। राज्य के विधि अधिकारी ने दलील दी कि याचिकाकर्ता बीएनएसएस के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों का इस्तेमाल किए बिना सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकते।

विधि अधिकारी ने छापेमारी के अवैध होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस एक आरोपी को गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही थी और इस संबंध में बाकायदा जनरल डायरी (जीडी) में प्रविष्टि की गई थी। उन्होंने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने केवल दरवाजे की घंटी बजाकर संबंधित व्यक्ति की मौजूदगी के बारे में पूछा था, और जैसे ही सूरी ने उनके घर में न होने की पुष्टि की, पुलिस दल बिना आवास में दाखिल हुए वहां से वापस लौट गया।

देर रात बिना वारंट कार्रवाई का आरोप

दूसरी ओर, फरहाद सूरी के वकील अनूप प्रकाश अवस्थी ने दलील दी कि 22 और 23 अगस्त की दरमियानी रात करीब 15 वाहनों में सवार होकर पुलिसकर्मियों का एक बड़ा दल बिना किसी तलाशी वारंट के उनके मुवक्किल के आवास में घुस आया था। अधिवक्ता ने यह दावा भी किया कि कथित छापेमारी की कार्रवाई पूरी होने के बाद जीडी एंट्री दर्ज की गई थी।

यह पूरा मामला रोड रेज के एक मामले में गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आरोपी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश से जुड़ा हुआ है, जिनकी खोज में पुलिस टीम दिल्ली स्थित पूर्व मेयर के आवास पर पहुंची थी।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top